साड्डा हक एथ्थे रख!!

                                साड्डा हक एथ्थे रख
एक बार की बात है ,रविवार का दिन था,सुबह का वक्त था,तेज पानी व् घने बादलो के बीच मेरी सुबह हुई तो बहार निकलकर देखा तो पास के विद्यालय के बहार हजारों युवाओं की भीड़ थी तथा ऐसी ही भीड़ पुरे शहर के विद्यालयों के बहार थी,वहां खड़े युवा सेण्टर के बहार चस्पा लिस्ट को बार-बार अपने एडमिट कार्ड के अनुरूप देख रहे थे,दर्हसल उस दिन परीक्षा होने वाली थी संघ लोक सेवा आयोग के सिविल सर्विसेज की|
अभी परीक्षा में काफी समय था,एक लेखक होने के नायते मैं उनसे बेरोजगारी पर बात करने निकला,उस सेण्टर पर खड़े युवा काफी दूर-दराज व् लम्बा रास्ता तय करके वहां पहुंचे थे,उनसे बात करना मेरे लिए काफी अनुभवपूर्ण रहा,उसी अनुभव को आपसे शेयर कर रहा हूँ|
बेरोजगारी का शब्द सुनते ही प्रत्येक व्यक्ति के दिलो-दिमाग में भारत का नाम पहले आता है,इसका यह मतलब नही है की बाकी देश में बेरोजगारी नही होती,होती है पर उस देश के निति-निर्माता इसे गंभीरता से लेते हुए इसकी जड़ तक पहुंचकर इसका समाधान खोज लेते है पर भारत में यह गंभीरता से नही लिया गया इसका दुष्परिणाम यह हुआ बेरोजगारी की दर लगातार नईं ऊंचाई को छूती जा रही है,सन 2001 में बेरोजगारी की दर लगभग 6..8% थी जो २०११ में 9.3% तक पहुँच चुकी है,लगभग 16 करोड़ युवा बेरोजगार है अगर यही व्यवस्था रही तो 65% युवाओं के देश में यह दर बहुत ज्यादा खतरनाक रूप ले सकती है और गरीबी को चरम पर ला देगी|
एक युवक शुरुआत करते हुए कहते है की बेरोजगारी का मुख्य कारण जनसँख्या वृद्धि है जहाँ 1947 के दशक में जनसँख्या लगभाग 33 करोड़ थी जो अब लगभग 125 करोड़ (२०११) पहुँच चुकी है| अशिक्षित समाज ने युवाओं की परेशानी में इजाफा किया है,शायद अशिक्षित समाज को पहले यही पता नही था बेरोजगारी शब्द है क्या क्योंकि उनके समय में रोजगार का मुख्य आधार कृषि हुआ करता था पर अब धीरे-धीरे यह आधार निजी क्षेत्र या सरकारी नौकरी या व्यवसाय बनता जा रहा है|
एक दुसरे युवक पहले वाले युवा के हाँ में हाँ मिलते हुए कहते है की यह एकदम सत्यं है कि कृषि लगभग 54% रोजगार प्रदान करता है जबकि सरकारी नौकरी लगभग और केवल 6% तथा निजी क्षेत्र लगभग 34% व बाकि 6% व्यवसाय रोजगार प्रदान करता है और कहते है की वर्तमान में कृषि का क्षेत्र लगभग भूमि पर 13% बचा है जो 50-60 साल पहले लगभग 58-60% हुआ करता था,कृषि का घटना युवाओं का रोजगार छीनने पर मजबूर करता है ,कृषि का कार्य करने वाले युवा स्किल्ड या इतने शिक्षित नहीं होते की उन्हें औधोगिक जगत में तुरंत कार्य मिल जाये ऐसे में उनके पास केवल मजदूरी ही एक सहारा बचता है|
वहां एक किसान परिवार से आये युवक कहते है कृषि जो 54% रोजगार प्रदान करता है उस रोजगार में कब आफत की बारिश,ओले,सूखा पद जाये कोई नही जानता,सूखे जैसे हालत में कोई कैसे केवल कृषि पर निर्भर रह सकता है जबकि सरकार से कोई उम्मीद न की जा सके हर वर्ष लगभग 5 लाख किसान आत्महत्या या पलायन करते है,कृषि की इस स्तिथि को देखकर युवा कृषि क्षेत्र से डरता है तथा वो मजदूरी की तरफ अग्रसर होता है,कहता की यदि किसानो की अच्छी तरह सुध लेना चालू कर दे तो कम्पितिसन का दायरा घट सकता है|
एक दुसरे युवक बाबा साहेब आंबेडकर की याद दिलाते हुए कहते है की देश में औधोगिक विकास जरुरी है पर इसके साथ-साथ देश में FDI ,कौशल विकास और जिम्मेदार सरकार का होना भी जरुरी है,औधोगिक विकास से ही हम विकसित देशों में शामिल हो सकते है|
एक युवक नाराजगी के साथ कहते है की सरकारों को न केवल कौशल विकास पर जोर देना होगा बल्कि युवाओं को ढोस आश्वासन दिलाना होगा की सरकार उन्हें रोजगार देने के लिए प्रितिबद्ध है,कांग्रेस ने 10 लाख युवाओं को रोजगार देने का वादा किया था,प्रधानमंत्री मोदी जी ने हर वर्ष २ करोड़ रोजगार देने का,पर बाद में यह सियासी जुमले बनकर रह गए,असल सरकार को यह ही नही पता है रोजगार आयेगा कहाँ से,पहले सरकार जल्द-जल्द बेरोजगार युवाओं को प्रिसिक्षित करे ताकि युवा औधोगिकीकरण की दुनिया में कदम रख सके या सरकार तय करे देश को कृषि प्रधान देश बनाना है या ओधगिक देश,सरकार किसानो के हितो के लिए प्रितिबद्ध हो ,सरकार को दोनों चीजों को वर्तमान में साथ लेकर चलना चाहिए|
एक युवक कहते है की बाहरी कंपनियां भारत में व्यापार को मुश्किल मानती है,जिससे रोजगार पैदा नही हो रहा,लगभग 50% कंपनियां कहती है उनके पास प्र्सिक्षित और स्किल्ड युवाओं की कमी है,और कई कंपनियां तो भारत से वापस जाना चाहतीं है!
एक युवक कहतें है की सरकारी नौकरी एक व्यवस्थित जीवन प्रदान करती है(भले ही इसका हिस्सा 6% हो) इसीलिए ज्यादातर युवा इसके पीछे भाग रहें है जबकी भारत विकसित देश तभी बनेगा जब इसका ओधिगिक विकास हो और कृषि को प्राथमिकता दी जाये तथा युवा इससे जुड़े,देश की अर्थव्यवस्था अब पूरी तरह ओधिगिक विकास तथा कृषि पर टिकी है और यदि युवा केवल 6% की तरफ भागता रहेगा तो अर्थव्यवस्था दिन व् दिन गोते खाती चली जाएगी|
एक दूर खड़े युवक कहते है की भले ही 6% रोजगार सरकारी क्षेत्र पैदा करता हो पर यह रोजगार उन्ही को मिलना चहिये जो इसके हक़दार या कहे पूर्ण पात्र और म्हणत से पहुंचे है,यांनी आरक्षण को समाप्त कर देना चाहिए,आरक्षण देश को खोखला बना रहा है,सरकार को आरक्षण ख़त्म करके कृषि पर जोर देना चाहिए जिससे युवा कृषि व् व्यवसाय की तरफ अग्रसर हो|
एक दुसरे युवक इसका कड़ा विरोध करते हुए कहते है की जबतक सामाजिक स्तिथि या देश की शिक्षा व्यवस्था प्रणाली सुधर नही जाये,भेदभाव ख़त्म नही हो जाये,और देश में जाति का कॉलम ख़त्म नही हो जाता तब तक आरक्षण रहना चाहिए ताकि समाज में समानता जल्द-जल्द आ सके और पिछड़ा वर्ग भी उसी श्रेणी में आ जाये|
एक मुस्लिम युवक कहता है की इस्लाम समाज में नौकरी या निजी क्षेत्र में रोजगार नही मिलेगा ऐसा एक पुराण बन चूका है और मुस्लिम वर्ग के लिए व्यवसाय ही पहला और आखिरी रास्ता है इस मिथ को हमे मिटाना है और सरकारों को भी हमारे वंचित होने की चिंता करनी चाहिए,आज लोग इस्लाम को गलत व् अपने तरीके से देखते है और रोजगार देने से हिचकते है,ऐसा क्यूँ है? हम भी भारतीय है और हमे भी एक भारतीय की ही नज़र से देखा जाना चाहिए|
इसी श्रंखला में कश्मीर से आये हुए एक युवक कहें है की हमें तो अन्य राज्यों के लोग आतंक्वादी व् देशद्रोही समझते है और रोजगार नही देते कश्मीर में लगभग 6 लाख युवा बेरोजगार है,कश्मीरी युवा अलगावबाद की तरफ झुक जाते है शायद वहां से पैसा मिलता है,यदि हम कश्मीरी आतंकवादी है तो वे बेरोजगार युवा भी उसी श्रेणी में आने चाहिए जो अन्य राज्यों में हिंदुत्व का अजेंडा उठाए घूमते है,दोनों को ही बर्गालाया जाता है |
एक दुसरे व्यक्ति कहते है की सरकारे हमारे साथ दोखा करती है जब वो चुनाव लड़ रहीं होती है तो बड़े-बड़े वादे करती हैं पर जब हम उसी बुनियादी सवाल पर बात करते है यानि रोजगार की बात करते है तो हमें भारत माता की जय में उलझाया जाता है या पार्टी के नारे लगाने में, चाहें कश्मीर में युवा बन्दूक उठा रहा हो,चाहें पंजाब में नशे में डूब रहा है,चाहे यूपी,गुजरात,महाराष्ट्र में हिंदुत्व या इस्लाम के नाम पर सर कटाने को तैयार हो सबकी समस्या केवल एक है वो है बेरोजगारी यदि बेरोजगारी ख़त्म हो जाये सारी समस्याएं खुद व् खुद समाप्त हो जाएगी पर सरकार ऐसा नही चाहती क्यूंकि फिर उसका कथित वोट बैंक नही रहेगा|
एक युवक कहतें है की 125 करोड़ के देश में सभी को नौकरी नही दी जा सकती ऐसी में निजी व्यवसाय या कृषि क्षेत्र में कार्य ही एक मात्र विकल्प बचता है,कोचिंग सेण्टर युवाओं को भगाने या दौड़ में शामिल रखने के लिए जुटी है जबकि वो खुद सरकारी नौकरी छोड़कर निजी व्यवसाय में लगी है और भले ही युवा इसके जाल में दिन व् दिन फसते जा रहें हो जो दिन व् दिन घटक सिद्ध हो रहा है,छात्र डिप्रेसन में आकर आत्महत्या करते पर असल समस्या को टटोल नही पाते,कोचिंग का व्यापार लगभग 2000 करोड़ रु० सालाना हो गया है और देश के बहार शिक्षा प्राप्त करने के लिए ५०००० करोड़ सालाना व्यय हो रहा है,इससे देश की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ कुशल युवा भी बहार प्रस्थान कर रहे है|
एक दुसरे युवक कहते है अब तो उच्च शिक्षा पाकर भी रोजगार की उम्मीद रखना बेईमानी सा बन गया है,हर साल भारत में 10-20 लाख इंजिनियर बनते है पर रोजगार केवल 10-20% लोगों को ही मिलता है इसी तरह FacebookMBA करने वालें 100 छात्रों में से केवल 7 को ही रोजगार मिल पाता है फिर या तो वो अपने परंपरागत व्यवसाय में लग जाते है या कोचिंग सेन्टरों के चक्कर काटने पर मजबूर हो जाते है.देश में केवल लगभग 4 करोड़ ही नौकरी है जिसके पीछे 16 करोड़ युवा भाग रहे है,नौकरी के पीछे भागने से तो अछ्छा है उन लोगों के श्रेणी में शामिल हो जाओ जो 20 रु० रोज कमाते है पर सुखी है|
काफी देर से कड़ी युवतियां में से एक युवती कहतीं है की देश की तरक्की व् उन्नति देश की महिलाओं की स्थिति पर निर्भर करती है,देश में लगभग आधी आबादी फीमेल है लेकिन पुरुषो के मुकाबले महिलाएं अत्यंत पीछे है ऐसे उनको आगे करना व् रोजगार देना सरकार व् समाज की प्राथमिकता है,उनको आगे करने के लिए आरक्षण ही एक रास्ता है तो आरक्षण उन्हें भी मिलना चाहिए पर बतौर महिला न धर्म,जाति के आधार पर ताकि वो भी रोजगार पाके बेहतर समाज और विकसित देश के निर्माण में मजबूती के साथ हाथ बटा सके|
एक युवती कहती है की चुनाव के समय ज्यादातर नेता महिलाओं से वोट निकलवाने के लिए उनके परिवार जनों से अपील करते है पर महिलाओं को ज्यादा महत्त्व नही दिया जाता,वह दुःख के साथ कहते है आज भी हमारे समाज में भेदभाव की प्रवत्ति है जो बेटियों,महिलाओं को कैद करना चाहती है वह एक वयान के तरफ इशारा करती है जो काफी विवादित भी हुआ था वो है - महिलाओं के नौकरी क्षेत्र में आ जाने से बेरोजगारी बड़ी है ||
एक युवती कहती है की संस्थाओं में सेक्स एजुकेशन को लागू कर देना चाहिए ताकि सही उम्र में शादी,सीमित बच्चे,रोजगार,बेहतर शिक्षा और भविष्य के प्रति सजग रहे|
वहां खड़े सारे युवा व् युवतियां एक आवाज़ में कहतें है की वो अब सरकार को आइना दिखाना चाहते है,सरकार से अब वे अपने हक की बात करने से नही हिचकेगें और बेरोजगारी की समस्या को सरकार के साथ हल करने का फैसला करेंगे और आने वाले समय में उसी सरकार का चुनाव करेंगे जिस पार्टी के पास बेरोजगारी को कम करने का मूलभूत सिद्धांत हो वो अब अपने भविष्य के प्रति सजग है और ज्यादा दिन तक बहकावे में आने वाले नही है,सरकार को अब जल्द से जल्द उपाय खोजना ही होगा नहीं तो आने वाले समय में इस वाक्य को कहने से हिचकेगें नही की साड्डा हक एथ्थे रख.|
                                                    -शुभम कमल
                                                                                                       22-JUL-2016



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