मलेगावं ब्लास्ट पर जांच एजेंसियों पर सवाल

                                  मलेंगावं ब्लास्ट 2006
मलेंगावं बम धमाके 2006 में देश की दो बड़ी एगेंसियों की भूमिका सवाल खड़ा करती है| मलेगावं धमाके में सबसे ज्यादा जान मुस्लिमो की गई थी,जिसमे महाराष्ट्र ATS ने साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित की भूमिका पर कार्यवाही करते हुए इनको दोषी माना था| जबकि वही चार्जसिट NIA ने २०१६ में अपनी जांच में महाष्ट्र ATS के सारे सबूत व गवाहों को बेबुनियाद बताकर पुरानी चार्जसीट को सिरे से खारिज कर दिया,और नए चार्जसीट में कहा की साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित के खिलाफ पर्याप्त सबूत न होने से इस कर्ह्वाही को आगे नही बढाया जा सकता|हालाँकि इसमें सरकारों के अस्तित्व में होने की भी भूमिका पर भी सवाल उठ रहें है, दर्हसल घटना के वक्त राज्य तथा केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी और अब जब NIA ने साध्वी प्रज्ञा को क्लीन चित दी है तो अब भाजपा,आरएसएस की सरकार केंद्र तथा राज्य दोनों में है|
पर सबसे ज्यादा सवाल देश की दो बड़ी एजेंसियों की भूमिका पर है की क्या वे सरकार के इसारे व् दवाब में काम करतीं है?
जिसमे सबसे ज्यादा साध्वी और कर्नल के विरुद्ध सबूत इकठ्ठा करने वाले अशोक चक्र हेमंत करकरे को २६/11 मुंबई ब्लास्ट में आरएसएस एक्टिविस्ट द्वारा मार दिया|
इसमें कोई दो राय नहीं की की साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित आरएसएस के एक्टिविस्ट है, साध्वी प्रज्ञा ने 2004 में अभिनव भारत तथा अखिल भारतीय विध्ह्यार्थी परिषद् व् आरएसएस को ज्वाइन किया था,जिसका अपना सविंधान वर्षो तक रहा और आरएसएस की विचारधारा को वही अपनाएगा जो उनके टर्म और कंडीशन व् पालिसी को फॉलो करता है और आरएसएस की विचारधारा हेद्गावकर और गोलवलकर से सीखी जा सकती है और क्या है सबको पता है|
खैर-
महाष्ट्र ATS  का आरोप था की जो बाइक बम  धमाके में इस्तेमाल की गई वो साध्वी की थी पर NIA ने बताया की बाइक दो साल पहले ही बेचीं जा चुकी थी| महाराष्ट्र ATS द्वारा लगाया गया मकोका NIA ख़ारिज कर दिया, अतस द्वारा पेश किये गए गवाह भी अचानक पलट गए,तथा अतस का आरोप था की मुस्लिमो के स्थान पर बम प्लांट करवाने में साध्वी ने भूमिका निभाई,जिसे NIA ने बकवास बताकर ख़ारिज कर दिया|
उधर जांच में 8 साल बीत गए इधर दो मिनट में केस रफा-दफा कर दिया गया! इन दो एजेंसियों की खींचा-तानी के बीच NIA की चीफ प्रोसकूटर ने NIA के द्वारा साध्वी को क्लीन चित दिए जाने का विरोध करते हुए यह कहते हुए रिजाइन कर दिया की-
जब से यह सरकार आयी है मुझे बार-बार यह बताया गया और दवाब डाला गया की मैं इस केस की जांच को या तो धीमी करदूं या बन्द –रोहिनी सालियन(Chief Prosecutor  NIA)
प्रसिद्ध पत्रकार कु,मार केतकर कहते है की – साध्वी के खिलाफ पर्याप्त सबूत है
तो क्या भारत सरकार niaNIA  जैसी संस्था पर दवाब बनाकार आरएसएस के भक्तों को बचा रहीं है?
क्या कांग्रेस मुस्लिमों को इकठ्ठा करने के लिए हिन्दुओं को नज़र अंदाज़ कर सकती है,देश के हर क्षेत्र में लगभग मुस्लिमों की आबादी हिन्दुओं से कम है तो क्या कांग्रेस बिना हिन्दुओं के सरकार बना सकती थी ?
क्या आईपीएस हेमंत करकरे झूठ बोल रहे थे?
क्या साध्वी और कर्नल के आरएसएस से मजबूत सम्बन्ध नही थे?
सवाल कई है पर मुंबई अतस की जांच को रदी कहकर NIANIA  द्वारा जलना सवाल खड़े करता है!
हिंदुत्व कभी आतंक वाद नही हो सकता पर कुछ आरएसएस और विहिप जैसे संस्थान हिंदुत्व को अपनी विचार धारा से जोड़कर आतंकवाद फैला रहे है.
NIA और अतस के वीच टकराव होने से दुनिया हमपर हसेगी,आखिर देश की बड़ी एजेंसिया अलग-अलग सरकार में अलग-अलग फैसले कैसे ले सकती है? इसके बीच अब ट्विटर पर आशाराम को बचाने की कबयद सुरु हो चुकी है, खैर-
जांच में निष्पक्षता खोटी जा रही है एसा होने से केवल न्याय की गुहार लगा रही जनता का नुक्सान है,दोने एजेंसियों को एक साथ एक संबाद स्थापित करना चाहिए की वो किस और जांच कर है.
अगर किसी के खिलाफ कोई सबूत नही है तो वो 8 साल से जेल में क्य्तुं है अगर है तो २ मिनट में कैसे खत्म हो गया|
इसके बीच USCIRF 2016 की रिपोर्ट –
धार्मिक हिंसा बाद रही है,सीखो,मुस्लिमो,च्रिस्तानो,को सताया जा रहा,धमकाया जा रहा है,छेडछाड हो रही है हिन्दुओं के द्वारा जब से बीजेपी-आरएसएस की सरकार बनी है.....!

- शुभम कमल 

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