आज़ादी:किस-किसको

   जैसा की हम जानते है की आज के समय में जो माहौल ,बन रहा है या बनाया जा रहा है वह इस तरह वायरस की तरह फ़ैल रहा है की जिसके लग जाये वो बीमारी से ग्रसित हो जाता है .
दर्हसल अभी हाल ही की बात है JNU में जैसा महाल बना मुझे नही पता की वहां कौन मौजूद था और किसने क्या किया पर जिस तरह का माहौल बनाने की कोसीस की गई की उल्ता खुद पर पड़े गया ..
वहां किसी ने देश विरोधी नारे लगाये और पकड़ा उनको गया जो इस देश की व्यस्थ्गा के खिलाफ संघर्ष कर रहे है क्योंकि सरकार को उनको विपक्ष में बोलना बिलकुल पसंद नही !
हालाँकि जनता का पूरा जन्मात और बहुमत दोनों प्राप्त है फिर नही वह नही चाहती की उनके विरोध या विचार धरा पर कोई सवाल उठाये दर्हसल एक संघठन आरएसएस जिसको लगता है की इस देश पर हिटलर की तरह राज क्र सकता है पर कानून उन्हें बार बार भारत देश की अखंडता और एकता का एहसास करता रहता है पर फिर भी ..
देश द्रोह के आरोप में ३० दिन सजा काट चुके कन्हैया कुमार जब जेल से बहार आये तो उन्होंने आरएसएस की विचार धरा पर सवाल खड़ा किया और बुनियादी वादों को याद दिलाया उनका कहना था की वह भारत से अजादी नही भारत में आज़ादी मांग रहे है ..
उनके उस भासन ने सरकार की खात ऐसी कड़ी की है की सरकार नर्म पड़ी हुई है ..
खैर कन्हैया जिस आज़ादी की बात कर रहा उससे सब भारतीय आज़ादी चाहते है पर सरकार को कतैयं बर्दाश्त नही है की उनसे कोई अपना हक मांगे ..
क्या मर रहे जवानो की आज़ादी के लिए संघ्रस करना देशद्रोह है !
क्या मर रहे हमारे लिए किसानो के हक की मांग करना देशद्रोह है!
क्या दलितों ,पिछडो ,मुस्लिमो के हक के लिए लड़ना देशद्रोह है !
क्या हिटलर वाली विचार धारा के खिलाफ बोलना देश द्रोह है!
क्या गरीबों के हक की लड़ाई लड़ना देशद्रोह है !
खैर ये तो हुई सरकार के डबल स्टैंड की बात हुई पर आज़ादी के 70 साल बाद भी आज़ाद है आप सोच के देखो ..
हम अपनी आजादी की तो बात करते है पर उनकी आजादी की बात कौन करेगा जो कुछ बोलने में असक्षम है ,उनकी जो ईमानदार है ,उनकी जो हमारे लिए अन्न उगतें है ,उनकी आजादी जो बिना कुछ लिए ही अपने बलिदान को तैयार है ,आज़ादी के 70 साल बाद उन जानवरों ,पक्षियों ,पेड़ों ,की आज़ादी कब जिन्हें हम सविंधान का हवाल देकर इन्सनिअत का शिकार बनते है क्यों हम मांस खाते है?
क्यों हम पेड़ों को काट देते है ?
क्यों हम पक्षियों पर अत्याचार करते है ?
क्यों हम नदियों को गन्दा करते है?
क्यों हम इमारतों की इज्ज़त नही करते?
उनकी आवाज़ कौन सुनुश्चित करेंगे ? क्या कन्हैय्या कुमार यह आवाज़ उठाएंगे ?क्या आरएसएस ने कभी यह सोचा ? क्या सविंधान ने कभी उन्हें आज़ादी नाम की कोई चीज़ दी ?
इसलिए की वह अपनी आज़ादी मांग नही सकते ,वो बोल नही सकते ,वो सरकार पर दबाब नही बना सकते ,ज़रा सोच के देखो की आज़ादी के 70 साल बाद किस किस को आज़ादी प्राप्त है हम कब तक अपनी आँखों पर पट्टी बांध कर केवल अपने लिए सोचेंगे .
आखिर पेड़ों को उनके कातिलों से आजादी कब ?
आखिर पक्षियों को उनके शिकारियों से आज़ादी कब ?Shubham Kamal
आखिर जानवरों को उनका मांस खाने वालें भक्षियों से आजादी कब ?
आखिर सुंदर पक्रात्रि को उसके प्रदूषित दुश्मनों से आज़ादी कब ?
विद्वान युवांयो को बेरोजगारी से आज़ादी कब,
कब या कभी या कभी नही ?
दोस्तों उनमे और हम्मे फर्क इतना है की हम अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए लड़ सकते है ,कह सकते है ,मांग सकते है ,छीन सकते है पर क्या ये लोग अपनी आज़ादी मांग सकते है ये केवेल हम लोगों पर निर्भर है
शायद इनका मन्ना है की इनकी आज़ादी हम पर निर्भर है इन्का ऐसा मानना है की हम उनको आज़ादी दे सकतें है अपना स्वाभाव बदलकर ..
जब तक इस देश का प्रतेक वास्तु ,आदमी , पक्षी ,जानवर ,नेचर पूर्ण रूप से आज़ाद नही हो जाते तब तक हम इस आजादी को केवल एक संघर्ष मानते है और अबभी यह आजादी मिल सकती है यदि हम अपना स्वाभाव और सोचेने का तरीका या रवैय्या बदल लें तो अजादी जो हम मान्ग् रहे है इसी व्यवस्था से सुनिश्चित करेंगें मेरा ऐसा मानना है ..
जब इस चीज़ को कहतें है बड़े बड़े विद्वान हमें सविंधान का अनुच्छेद 21 याद दिलाता है तो कोइ धर्म का हवाल देता है तो कोई कहता है की हमें आप आप राष्ट्र धर्म मत सिखाएं ||
मेरा ऐसा मानना है की जिस अजादी की लड़ाई हम लड़ रहें है हम उनसे आज़ादी पा सकते है और इसी सविंधान से कानून से और व्यवस्था से चाहें वो ..
बचपन में जीने की आजादी हो ,
गरीबी से आजादी हो,
महिला की सुरक्षा के लिए लड़ने की आज़ादी हो,
दलितों,पिछडो,मुस्लिमो,शोषित,वाचिंतो,के हक दिलाने की आजादी हो ,
विचारधारा न थोपने की आज़ादी हो ,
पक्षियों की आज़ादी हो,
जानवरों की आज़ादी हों ,
पेड़-पौधों के पलने की आज़ादी हो,
नेचर के सुन्दरता बनाये रखने की आज़ादी हो या कुछ भी सोचो हमारा जीवन और देश कितना सुखमय होगा जब  ये सारी चीज़ आजाद होंगी ,
कल्पना करों अगर हम मांस खाना छोड़ दें ,पक्षियों को मरना छोड़ दें ,गरीब को सताना छोड़ दें ,किसानो को ठगना छोड़ दें तो जीवन कितना सुन्दर होगा |||
और इसमें देशद्रोह है तो मुझे जेल में दाल दिया जाये ,,,,,,,!
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